Arjun ka ped क्या आप जानते हैं Arjun ka ped के औषधीय गुण ?

Arjun ka ped आज हम आपको Arjun k ped के बारे में बताएंगे। Arjun ka ped एक औषधीय वृक्ष हैं, जिसमें बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं ।आइए जानते हैं। Arjun(Arjuna) ka ped कैसा होता हैं। 

Arjun ka ped का परिचय 

Arjun ka ped एक औषधीय वृक्ष हैं। यह सदाबहार वृक्ष हैं। इसकी ऊंचाई लगभग 70 फ़ीट तक होती हैं। यह वृक्ष  शुष्क पहाड़ी वाले क्षेत्रों में, नदी नालों के किनारे, बिहार ,हिमालय की तराई वाले स्थानों पर और मुख्यतः भारत में अधिक मात्रा में पाया जाता हैं।

अर्जुन के वृक्ष की एक विशेषता हैं, कि अगर इसकी छाल पेड़ से निकल जाती हैं, तो वह दोबारा उग जाती हैं। इसकी छाल का ही उपयोग अधिकतर होता हैं। अर्जुन के वृक्ष को उगने के लिए कम से कम 2 साल की  ऋतुओ की आवश्यकता होती हैं। 

Arjun ka ped की छाल बहुत ही सफेद अंदर से कितनी मोटी और हल्के से गुलाबी रंग में पाई जाती हैं। इसकी छाल की मोटाई 4 मिली मीटर की होती हैं। अर्जुन के वृक्ष में कुछ लिखने पर गोदने पर या किसी चीज से निशान बनाने पर इसमें से एक प्रकार का दूध जैसा पदार्थ निकलता हैं। इसका स्वाद कसैला तीखा होता हैं।

इसकी छाल की एक विशेषता यह भी है कि वर्ष में एक बार स्वयं ही वृक्ष से निकलकर गिर जाती हैं। अर्जुन के वृक्ष के पत्ते अमरूद के पत्तों के जैसे होते हैं जो लंबे पर आयताकार होते हैं और मुश्किलें भी होते हैं इसके किनारों की बनावट नुकीले जैसी होती हैं। यह बसंत ऋतु में आते हैं।

अर्जुन के वृक्ष में फल बसंत ऋतु में ही आते हैं, इसके फल से हल्की सी सुगंध आती हैं। अर्जुन के वृक्ष के लंबे तथा अंडाकार होते हैं, इसमें फल जेठ मास और सावन मास के महीने में होते हैं। यह शीत ऋतु में पक कर तैयार हो जाते हैं, इसके फल कच्ची अवस्था में हरे – पीले रंग के होते हैं और पकने के बाद इसके फल भूरे लाल रंग के हो जाते हैं।  इसके फलों का स्वाद कड़वा तथा पसंद न आने वाला होता हैं। अर्जुन के वृक्ष का बीज अर्जुन का फल हैं। 

Arjun ka ped लगभग 15 प्रजातियो का हैं और यह भारत में मौजूद है Arjun(Arjuna) ka ped का उपयोग अधिकतर होम्योपैथी में किया जाता हैं।

अर्जुन के वृक्ष के फायदे एवं नुकसान

अर्जुन की छाल के फायदे 

  • इसकी छाल के रस को औषधी के रूप में होता हैं।
  • अर्जुन की छाल का उपयोग हृदय रोग से जुड़ी बीमारियों को दूर करने में भी किया जाता हैं। 
  • टीवी जैसी बीमारी को दूर करने के लिए भी इसकी छाल का उपयोग किया जाता हैं।
  •  अगर किसी के कान में दर्द हैं, तो उस से राहत पाने के लिए इसकी छाल का उपयोग कर सकते हैं। 
  • सूजन, बुखार के उपचार के लिए भी इसकी छाल का उपयोग किया जाता हैं। यह बहुत ही लाभकारी होता हैं।

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नुकसान 

  • जिन व्यक्तियों को बीपी और डायबिटीज की शिकायत हैं। जो दवाई का सेवन करते हैं उन्हें अर्जुन की छाल का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  • गर्भावस्था में अर्जुन की छाल का उपयोग करने से पहले चिकित्सक की परामर्श लेना अनिवार्य हैं।

अर्जुन के वृक्ष के औषधीय गुण

  •  कान का दर्द  – अर्जुन के वृक्ष के पत्तों के रस को कान में डालने से लगभग 3 से 4 दिन तक डालने से कान का दर्द कम हो जाता हैं।
  •  हृदय रोग – हृदय को समस्त रोगों से बचाने के लिए स्वस्थ रखने के लिए अर्जुन की छाल का उपयोग किया जाता हैं।
  1.  अतः अर्जुन की छाल में एक चम्मच महीन जून को एक कप दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए ।
  2. अगर किसी के हृदय की धड़कन 72 से बढ़ाकर 150 से ऊपर सुपर हो जाती है तो ऐसी स्थिति में अर्जुन की छाल का चूर्ण एक गिलास टमाटर के रस में एक चम्मच मिलाकर सेवन करने से राहत मिलती हैं।
  •  पेट में गैस बनना – अर्जुन की छाल के काढ़े का नियमित रूप से सेवन करने से पेट की गैस से राहत मिलती हैं,लगभग 10 से 20 मिलीलीटर का ही सेवन करना चाहिए ।
  • पेचिश की बीमारी – अर्जुन की छाल का चूर्ण लगभग 5 ग्राम उसमें 250 मिली लीटर गाय का दूध समान पानी की मात्रा मिलाकर तब तक पकाना चाहिये जब तक दूध शेष नहीं बचता फिर उसमें 10 ग्राम शक्कर मिलाकर उसे रोज पीने से हृदय संबंधी रोगों का होता हैं।
  •  डायबिटीज के रोग – मधुमेह की बीमारी में अर्जुन की छाल नीम की छाल ,अमलकी छाल,नीलकमल का चूर्ण और हल्दी मिलाकर उसे पकाकर एक प्रकार का काढ़ा बनाना चाहिए 10 से 20 मिलीलीटर काढ़े में शहद मिलाकर उसे रोज सुबह पीने से लाभ होता हैं।
  •  हड्डी टूटने पर – अर्जुन की छाल का उपयोग हड्डी जोड़ने में मदद करता हैं।
  •  मुहासे – आजकल की प्रदूषित वातावरण में मुंहासे की परेशानियां बहुत हद तक बढ़ गई हैं। Arjun ka ped की छाल का उपयोग करके हम न सिर्फ मुहांसों से छुटकारा पा सकते हैं बल्कि चेहरों को भी निखार सकते हैं। अर्जुन की छाल का चूर्ण बनाकर उसमें मधु मिलाकर एक प्रकार का लेप तैयार करें फिर उसे चेहरे पर लगाने से मुहांसों में आराम मिलता ।
  •  बुखार – यह बुखार में भी काफी राहत देता है –
  1.  लगभग 20 मिलीलीटर अर्जुन की छाल छाल का काढ़ा पिलाने से बुखार में राहत मिलती हैं। 
  1. बुखार के कष्ट को कम करता हैं। उसके लिए एक चम्मच अर्जुन की छाल के चूर्ण को गुड़ के साथ खाना चाहिए।
  • अगर आपके दांत पीले और काले पड़ रहे हैं तो उसमें अर्जुन की छाल बहुत ही लाभदायक होती है अर्जुन की छाल के चूर्ण से दांत को साफ करने से दांत साफ होते हैं।
  • गुर्दे में पथरी की समस्या है उसमें अर्जुन की छाल को उबाल कर उसे छानकर पीने से फायदा मिलता हैं।

निष्कर्ष 

हमने आपको अर्जुन की छाल के बारे में बहुत कुछ बताया हैं। अर्जुन की छाल का उपयोग चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही करना चाहिए। क्योंकि इसके उपयोग से नुकसान भी हो सकते हैं।

जैसा कि हमने बताया अगर आप किसी भी औषधि का उपयोग आयुर्वेदिक रूप में कर रहे हैं तो उसके लिए चिकित्सक की सलाह / परामर्श लेना अनिवार्य होता हैं।

यह हमारे स्वास्थ्य की बात होती हैं, तो हमें अपने अनुसार कुछ भी नहीं करना चाहिए ,चिकित्सक के परामर्श अवश्य लें ।आशा करते हैं आप हमारी यह पोस्ट Arjun ka ped जरूर पसंद आई होगी। पोस्ट Arjun ka ped से संबंधित जानकारी जरूर सांझा करे।

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