Jamun ka ped अनेकों औषधीय गुणों से है भरपूर क्या आपको पता है ?

Jamun ka ped कैसा होता हैं,इसके औषधीय गुण क्या हैं?

आज हम आपको jamun ka ped के बारे में बताएंगे ।जामुन एक प्रकार का फल है। jamun ka ped  का फल खाने से क्या लाभ होते हैं ,क्या नुकसान हैं। यह कैसा होता है। इसके बारे में आपको कुछ जानकारियां देंगे –

जामुन के पेड़ का परिचय

jamun ka ped एक विशाल पेड़ हैं।Jamun ka ped बहुत ही फैली हुई शाखाओ वाला होता हैं। जामुन का पेड़ लगभग 30 से 35 फीट तक ऊंचा होता हैं। जामुन के पेड़ की छाल भूरे रंग की होती हैं, और यह बहुत ही चिकनी होती हैं, इसकी छाल लगभग 2.5 सेंटीमीटर तक मोटी होती हैं। जामुन के पेड़ के फूल हल्के पीले रंग के होते हैं तथा छोटे छोटे होते हैं और इनमें बहुत अच्छी सौगंध होती हैं।

यह फूल मार्च-अप्रैल महीने तक ही आते हैं उसके बाद इन फूलों में जामुन बनना शुरू हो जाता हैं। जामुन के फल को बाजारों में भी बेचा जाता हैं, jamun ka ped फल भी देता हैं ।जामुन एक प्रकार का फल है जो बैंगनी रंग का होता है जामुन को ब्लैकबेरी भी कहते हैं यह स्वाद में मीठा होता हैं। इस फल को सभी लोग बहुत चाव से खाते हैं और यह  फल सभी को बहुत पसंद आता हैं। जामुन का फल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता हैं, इसमें गुठली भी पाई जाती हैं और जामुन की गुठली भी बहुत काम आती है एक प्रकार से औषधि का काम करती हैं।

jamun ka ped या जामुन की खेती

jamun ka ped एक सदाबहार वृक्ष हैं। इस पर बदलते हुए मौसम का कुछ खास असर दिखाई नहीं पड़ता हैं। यह वृक्ष ठंडी जलवायु वाले देशों में नहीं लगाया जा सकता। जामुन का फल गर्मियों में खाने लायक होता हैं। जामुन का फल लगभग 30 से 40 साल तक फल देता है jamun ka ped लगभग 50 से 60 साल तक की आयु का होता हैं।

  • जामुन की खेती करने के लिए इसके बीज और कलम का उपयोग किया जाता हैं।
  • जामुन के छोटे पौधे को बहुत ही देखभाल की जरूरत होती हैं। इसे गर्म हवाओं और पाला  से बचाना चाहिए।
  • जामुन को उगाने से पहले इसकी मिट्टी का चुनाव अच्छे से कर लेना चाहिए इसके लिए दोमट मिट्टी उपयुक्त होती हैं।
  • जामुन की खेती करने के लिए मिट्टी का पी.एच मान लगभग 6 से 8 होना चाहिए।
  • मानसून के मौसम में जामुन की रोपाई करनी चाहिए
  • गर्मियों में तेज धूप होती हैं, जो जामुन की वृक्ष के लिए नुकसानदायी होती हैं। और ठंडी में पड़ने वाला पाला भी नुकसानदायी होता हैं।
  • जामुन के खेती से अच्छा और स्वादिष्ट फल पाने के लिए हमें इसके पेड़ की उतनी देखभाल और सेवा करनी पड़ती हैं।

जामुन की प्रजाति

  • राजा जामुन  -जामुन की एक प्रजाति हैं जो भारत में अधिकांश पसंद की जाती हैं। इस प्रजाति के फल का रंग बैंगनी होता हैं। और इसमें पाई जाने वाली गुठली आकार में छोटी होती हैं। यह मीठा और रसेदार होता हैं।
  • काथा – यह जामुन की ही दूसरी प्रजाति हैं। इसमें फल का आकार छोटा होता हैं और इसका रंग अधिक गहरा जामुनी होता हैं। इसका स्वाद हल्का खट्टा होता हैं। और यह बेर के आकार का होता हैं। इसमें गुदे की मात्रा कम पाई जाती हैं।
  • भादो – यह जामुन की ही एक प्रजाति हैं। यह आकार में ज्यादा बड़ा नहीं होता हैं। इसका रंग गहरा बैंगनी होता हैं। जय बारिश के मौसम तक तक पक जाता हैं। इसका स्वाद खटाई के लिए हल्का मीठा होता हैं।
  • गोमा प्रियंका  – यह एक प्रयोग के द्वारा विकसित कि हुयी प्रजाति हैं, इस किस्म की प्रजाति में फल ज्यादा गुजदार पाया जाता हैं। और इसका स्वाद मीठा होता हैं। तथा खाने के बाद कसेला स्वाद देता हैं।

धार्मिक महत्व

  • सी आई एस एच जी- 37 –  इस किस्म का रंग गहरा काला होता हैं। यह बारिश के मौसम में पक कर तैयार हो जाता हैं। यह बहुत ही गूदेदार और रसदार स्वाद का मीठा होता हैं।
  • जामुन के पेड़ के बारे में वास्तु शास्त्र में भी बताया गया हैं। वास्तु के ज्ञाता यह बताते हैं कि jamun ka ped शुभ फलदाई होता हैं। अगर इसे दक्षिण दिशा में लगाया जाए तो।
  • अगर jamun ka ped उत्तर दिशा में लगाया गया हैं, तो यह शुभ नहीं माना जाता हैं। वास्तु के अनुसार उत्तर दिशा में लगाया गया जामुन का पेड़ अशुभ फलदाई होता हैं।

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जामुन के फायदे एवं नुकसान

जामुन का सेवन करने से बहुत से फायदे होते हैं और इसके कई नुकसान भी हैं। jamun ka ped अधिकतर फायदे ही देता हैं। आइए जानते हैं – 

फायदे

  • जामुन में ग्लूकोज की मात्रा भरपूर होती हैं। और इसमें फ्रुक्टोज भी पाया जाता हैं। जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता हैं।
  • जामुन का सेवन करने से गर्मी के दिनों में लू से बचा जा सकता हैं।
  • जामुन में विटामिन बी और लोह की मात्रा भरपूर होती हैं।
  • जामुन का सेवन करने से पहले इसमें नमक जरूर मिलाना चाहिए नमक के साथ जामुन को खाना बहुत ही लाभकारी होता हैं।
  • जामुन खाने से इम्यूनिटी बढ़ती हैं।
  • जामुन के फल का बीज भी बहुत ही फायदेमंद होता हैं। इसके बीच में प्रोटीन कैल्शियम और कार्बोहाइड्रेट जैसे तत्व पाए जाते हैं, यह आयरन का भी बहुत अच्छा स्रोत हैं।

नुकसान

  • जामुन का बहूत ज्यादा सेवन करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक भी होता हैं।
  • किसी भी व्यक्ति को खाली पेट जामुन का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • जामुन खाने के बाद दूध को कभी भी नहीं पीना चाहिए।
  • जामुन में अम्लीय तत्व पाए जाते हैं इसीलिए इसका अत्यधिक सेवन करने से खांसी हो सकती हैं और यह फेफड़ों के लिए भी अच्छा नहीं होता हैं।
  • खासकर उन महिलाओं को जामुन का सेवन नहीं करना चाहिए जो बच्चो को दूध पिलाती हैं।
  • जामुन के अत्यधिक सेवन से ब्लड शुगर, कब्ज,एक्ने, उल्टी, एसिडिटी आदि हो सकते हैं।

औषधीय गुण

जामुन में कौन से गुण तो होते ही हैं, साथ ही साथ इसकी गुठली और छाल में भी कुछ औषधीय  गुण पाए जाते हैं। आज हम आपको उन्हीं के बारे में बताएंगे आइए जानते हैं –

जामुन के औषधीय गुण

  • मधुमेह के रोगियों को जामुन खाना बहुत ही लाभदायक होता हैं। यह एक रामबाण उपाय हैं डायबिटीज को नियंत्रण में रखने का।
  • पेट में होने वाली ऐंठन को कम करने के लिए भी जामुन खाना आवश्यक होता हैं। इससे पेट की ऐंठन और दर्द दोनों दूर हो जाता हैं।
  • खून की कमी को भी जामुन दूर करती हैं, एवं रक्त की पूर्ति करती हैं।
  • अगर किसी का लीवर कमजोर हैं, तो उसे जामुन का रस पीना चाहिए ।
  • पथरी के उपचार के लिए भी जामुन लाभकारी होता हैं।
  • जामुन का चूर्ण बनाकर उसे खाने से आवाज अच्छी होती हैं। अर्थात सुरीली होती है साफ होती हैं।
  • छोटे बच्चों की दस्त की समस्या हो तो उन्हें जामुन का चूर्ण खिलाना चाहिए इससे उन्हें रहल मिलेगी।

जामुन की गुठलियों, छाल और पत्ते के औषधीय गुण

  • ब्लड प्रेशर को नियंत्रण रखने के लिए जामुन की गुठली का उपयोग किया जाता हैं।
  • पेट की दर्द को दूर राहत पाने के लिए जामुन की छाल का उपयोग किया जाता हैं इसका काढ़ा बनाकर पीना चाहिए।
  • जिनको मसूड़ों से खून आता  हैं, वह जामुन की गुठली को पीसकर और उसमें स्वादानुसार नमक मिलाकर खाने से खून आना बंद हो जाता ।
  • यदि आपकी मसूड़ों में सूजन है और आप इससे निजात पाना चाहते हैं तो जामुन के पत्तों को उबालकर उसके पानी से कुल्ला करना चाहिए इससे काफी राहत मिलती हैं।
  • मुंह की दुर्गंध से बचने के लिए जामुन के पत्तों को चबाना चाहिए।
  • जो व्यक्ति गठिया की समस्याओं से परेशान हैं, उन्हें जामुन की छाल को पीसकर अपने जोड़ों में लेप की तरह लगाना चाहिए।
  • जामुन की गुठली का प्रयोग त्वचा को निखारने के लिए भी किया जाता हैं। इसकी गुठली को पीसकर उसमें दूध मिलाकर चेहरे में जहां दाग हो या फिर पिंपल्स हो वहां लेप लगाने से चेहरा साफ होता हैं।

निष्कर्ष

हमने आपको jamun k ped के बारे में बताया जामुन एक बहुत ही पौष्टिक फल हैं। परंतु ऐसा कहा जाता हैं कि किसी भी चीज का अधिक उपयोग या सेवन नहीं करना चाहिए यह बहुत ही हानिकारक होता हैं। उसी प्रकार jamun k ped के फल का भी  सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

 आशा करते हैं आपको हमारी यह पोस्ट jamun ka ped अच्छी लगी होगी ।आपके लिए जामुन के बारे में जानकारी उपयोगी रही होगी ।अगर आपके कोई भी प्रश्न है हमारी पोस्ट jamun ka ped से और जामुन से जुड़े तो आप हमसे साझा कर सकते हैं।

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