Neem ka ped क्या आप जानते हैं नीम का पेड़ कितना लाभकारी हैं?

आज हम आपको नीम के पेड़ के बारे में बताएंगे। Neem ka ped एक बहुत ही बहुउपयोगी वृक्ष हैं। इसका उपयोग औषधी के रूप में भी किया जाता हैं। और इसके कुछ धार्मिक महत्व भी हैं। इसके कुछ गुण है कुछ फायदे हैं तो इसके कुछ नुकसान भी हैं आइए जानते हैं।

नीम के पेड़ का परिचय 

Neem ka ped पतझड़ी प्रजाति का होता हैं। Neem ka ped लगभग 50 से 60 फुट फुट तक ऊंचा होता हैं। इसकी शाखाएं बहुत ही फैली हुई होती हैं यह लगभग 1.2 मीटर के व्यास में फैला हुआ होता हैं। इसकी छाल बहुत ही कठोर होती हैं और इसकी छाल का रंग सफेद या फिर लाल भूरे रंग का होता हैं। इसके फूलों का रंग सफेद होता हैं। और यह बहुत ही सुगंधित होते हैं। यह फूलों के गुच्छे के समान लटके हुए होते हैं जिनकी लंबाई लगभग 10 इंच होती हैं। नीम का फल बहुत ही चिकना गोलाकार का और अंडाकार होता हैं। इसे निंबोली भी बोलते हैं

Neem ka ped का फल का छिलका बहुत ही पतला और गुदा रेशेदार होता हैं। इसका फल सफेद पीले रंग का स्वाद में बहुत ही कड़वा और मीठा होता हैं। इसमें गुठली भी पाई जाती हैं। जो बहुत ही कठोर और कड़वी होती हैं। इसकी गुठली के फल में कभी-कभी दो से तीन बीज होते हैं जो भूरे रंग के होते हैं नीम का पेड़ खेती के लिए लाभदायक नहीं माना जाता है नीम का पेड़ छायादार पेड़ों की गिनती में आता हैं।

Neem ka ped औषधीय गुणों से भरपूर होता हैं। इसका हर एक भाग बहुत ही उपयोगी माना जाता हैं। इनके पेड़ की पत्तियां भी बहुत ही उपयोगी होती हैं, यह बहुत ही अधिक संख्या में पाया जाता हैं। नीम का उपयोग दैनिक जीवन में किया जाता हैं। नीम की पत्तियां बहुत ही गुणकारी मानी जाती हैं। इससे किसी भी प्रकार के संक्रमण को रोका जा सकता हैं।

धार्मिक महत्व

भारतीय संस्कृति में Neem ka ped धार्मिक रूप से भी बहुत ही महत्व है –

  • शास्त्रो के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि देवी शक्ति की उपासना करने के लिए नीम का प्रयोग किया जाता हैं।
  • शास्त्रो में माना गया हैं कि, शीतला माता और काली माता की पूजा करने के लिए भी नीम का उपयोग किया जाता हैं।
  •  शनि और केतु का भी संबंध ज्योतिष में नीम से ही माना जाता हैं।
  • ऐसा माना जाता है कि शनि को शांत करने के लिए नीम की लकड़ी से किया गया हवन लाभकारी होता है और शुभ फलदाई होता हैं।
  •  ज्योतिष के अनुसार ऐसा भी कहा गया है कि नीम की पत्तियों से स्नान करने से केतु भी शांत होता है और केतु से होने वाले कष्ट दूर होते हैं।
  •  नीम की लकड़ियों से निर्मित यंत्र प्रभावशाली माने जाते हैं।

विशेष प्रकार से नीम का उपयोग कहां किया जाता है ?

  •  शास्त्रों के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर नीम का पौधा लगाना बहुत ही शुभ माना जाता हैं।
  •  Neem ka ped या पौधा घर में ऐसी जगह पर लगाना चाहिए जहां से हवा आती हो।
  •  नीम की लकड़ी का वंदन बनाकर उसे घर के मुख्य द्वार पर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा / शक्ति दूर रहती हैं। 
  • नीम की लकड़ी से बने पलंग में सोने से त्वचा संबंधित समस्याएं दूर हो जाती है पिंपल्स मुंहासे आदि ठीक हो जाते हैं।
  •  नीम के उपयोग हमेरी सेहत के लिए अत्यंत लाभदायी होता हैं इसका उपयोग करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है अतः इसका सेवन करना आवश्यक होता हैं।

फायदे

  •  Neem ka ped पर्यावरण को अनुकूल रखता हैं।
  •  नीम की लकड़ी से दातुन करने से दांत सफेद मजबूत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।
  •  नीम की पत्तियों का सेवन करने से रक्त शुद्ध रहता हैं।
  •  नीम की पत्तियां खाने से त्वचा भी स्वस्थ रहती है और चमकदार हो जाती हैं।
  •  नीम की पत्तियां बालों को स्वस्थ कर रखने के लिए भी लाभदायक होती हैं नीम की पत्तियों का लेप बालों में लगाने से बालों के झड़ने की समस्या दूर हो जाती हैं।

नीम के औषधीय गुण

  1. चर्म रोग की बीमारी – नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर  और फिर उस पानी से नहाने पर चर्म रोग जैसी बीमारी दूर हो सकती हैं।
  1. Neem ka ped की छाल का लेप लगाने से घाव को जल्दी भरा जा सकता हैं। यह घावों के निवारण के लिए बहुत ही सहायक मानी जाती हैं।
  1.  नीम का फल और उसकी पत्तियों से निकाले गए बनाए गए तेल से शरीर की मालिश करने से शरीर स्वस्थ रहता हैं। और सब विकारों से दूर रहता हैं।
  1.  आंखों के रोग – नीम की पत्तियों से रस निकालकर आंखों में डालने से आंखों की बीमारी या फिर कंजेक्टिवाइटिस में काफी राहत मिलती हैं।
  1.  पीलिया – पीलिया जैसे रोग को भी नीम से ठीक किया जा सकता हैं। नीम की पत्तियों का रस निकालकर उसमें 2:1 के अनुपात में पानी मिलाकर पीने से पीलिया ठीक हो सकता हैं।
  1.  जिन व्यक्तियों को पसीना ज्यादा आता हैं। वह नीम की पत्तियों से बने तेल की 8 से 10 बूंद को सोते समय दूध में मिलाकर पीने से पसीना और जलन से होने वाले सभी विकारों से छुटकारा पा सकते हैं।
  1.  नीम के बीजों का चूर्ण बनाकर उसे खाली पेट गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से बवासीर में काफी राहत मिलती हैं। और ऐसी बीमारियों से निजात मिलता हैं।
  1. मधुमेह – मधुमेह के रोगियों के लिए नीम बहुत ही अच्छा स्त्रोत हैं। इससे डायबिटीज नियंत्रण में रहती हैं।
  1. नीम की पत्ती खाने से मुंह में बदबू आना बंद हो जाता है नीम का सेवन करने से शरीर में मौजूद बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं नीम का रस पीने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता रहता हैं।

नुकसान 

जिस तरह Neem ka ped फायदेमंद होता हैं उसके कुछ नुकसान भी हैं इस प्रकार हैं –

  • नीम का उपयोग करने से पहले अर्थात आयुर्वेदिक रूप से उपयोग करने से पहले चिकित्सक का परामर्श लेना अनिवार्य होता हैं।
  • नीम के रस का सेवन रोज की दिनचर्या में नहीं करना चाहिए यह शरीर के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता हैं।
  •  नीम की पत्तियों का उपयोग उन लोगों को नहीं करना चाहिए जिनकी त्वचा संवेदनशील अर्थात सेंसिटिव होती हैं। ऐसी स्थिति में नीम का तेल त्वचा के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता हैं।
  •  नीम स्वाद में बहुत ही कड़वा होता हैं। इससे  उल्टी आने की संभावना भी बढ़ जाती हैं।

निष्कर्ष 

हमें कभी भी नीम का उपयोग घरेलू उपचार में करने से पहले चिकित्सक के परामर्श / सलाह लेनी चाहिए ।नहीं तो यह हमारे लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता हैं।इसका स्वाद बहुत ही कड़वा होता हैं। इसका सेवन करने से उल्टी भी हो सकती हैं। नीम का उपयोग जितना लाभकारी होता हैं, उतना ही इसको सीमित मात्रा में सेवन करना चाहिए। प्रतिदिन नीम का उपयोग या फिर सेवन नहीं करना चाहिए।

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