Shami ka ped जिसके हैं अनेकों चमत्कारी औषधीय गुण

Shami ka ped कितना लाभकारी है?

आज हम जानेगे की shami ka ped कितना उपयोगी हैंऔर यह धार्मिक दृष्टि से भी बहुत ही पूज्यनीय माना जाता हैं।भारतीय इसकी पूजा करते हैं और shami ka ped देव वृक्ष की उपाधि से सुसज्जित हैं।

shami ka ped कैसा होता हैं और उसका  परिचय

पेड़ पौधे लगाना बहुत ही गौरव का काम हैं, और कुछ पेड़ पौधे ऐसे होते हैं जो भारतीय संस्कृति में पूजनीय होते हैं, जिनकी पूजा की जाती हैं। shami ka ped भी इसी प्रकार का एक वृक्ष हैं।

शमी के पेड़ की पहचान हम इस प्रकार कर सकते हैं, shami ka ped लगभग 9 से 18 मीटर तक ऊंचा होता हैं। यह मध्यम आकार का पौधा होता हैं, और हमेशा हरा-भरा ही रहता हैं।

shami ka ped एक ऐसा वृक्ष हैं, जिसमें छोटे छोटे प्रकार के कांटे होते हैं इसकी शाखाएं फैली हुई होती हैं तथा बहुत ही पतली और झुकी हुई होती हैं shami ka ped रंग में हल्का भूरा होता हैं, शमी के पेड़ में बहुत से औषधीय गुण भी पाए जाते हैं तथा भारतीय संस्कृति में यह बहुत ही पूजनीय माना जाता हैं, हिंदू धर्म के अनुसार शमी के पेड़ की पूजा की जाती हैं। ऐसा माना जाता हैं कि शमी की एक पत्ती लगभग 108 पत्तियों के बराबर मानी जाती है इसे बेलपत्र के बराबर ही माना जाता है और शिव जी को अर्पण किया जाता हैं।

शमी के पेड़ के फायदे एवं नुकसान

यदि किसी वृक्ष के कुछ फायदे होते हैं तो उनके कुछ नुकसान भी होते हैं हम आपको शमी के वृक्ष के फायदे एवं नुकसान के बारे में बताते हैं।

फायदे

  • जैसा कि हम जानते हैं कि सभी के पेड़ में काफी अच्छे गुण पाए जाते हैं और शमी के पेड़ की लकड़ियों को घिसकर उन्हें चेहरे पर लगाने से हम कील मुंहासे और दाग धब्बों से छुटकारा पा सकते हैं।
  • खुजली में भी शमी की पेड़ की पत्तियों को पीसकर इसका लेप बनाकर इस में दही मिलाकर शरीर के जिस हिस्से में खुजली हो रही है वहां लगाकर हम खुजली से राहत पा सकते हैं।
  • जहर का असर कम करने के लिए भी शमी की पत्तियों के रस का उपयोग लाभकारी होता हैं, शमी की पत्तियों के रस में नीम की पत्तियों का रस मिलाकर पीने से जहर का असर कम हो जाता हैं।

नुकसान

  • shami ka ped या फिर शमी को हम  केशहांत्री भी कहते हैं क्योंकि इसके अधिकतर इस्तेमाल से बाल झड़ने की संभावना बढ़ जाती हैं अतः इसकी छाल को हड़ताल के साथ मिलाकर लगाने से बाल झड़ते हैं।

शमी के पेड़ की विशेषताएं

भारतीय गुणों के साथ-साथ शमी के पेड़ में कुछ खास विशेषताएं भी पाई जाती है आइए जानते हैं  –

  • shami ka ped 12 महीने हरा भरा रहता है यह कभी सूखता नहीं हैं।
  • शमी के फूल बहुत ही सुंदर तथा पीले रंग के होते हैं।
  • शमी के फूल जनवरी में आने शुरू हो जाते हैं और फरवरी से मार्च तक के समय में इसके फूल खिलने लगते हैं।
  • शमी के फूल को पूर्णता खेलने में लगभग 6 से 7 महीने लगते हैं।
  • शमी के पेड़ के विकास के लिए ने ज्यादा जल की आवश्यकता नहीं होती है।
  • शमी के पेड़ का जीवनकाल लगभग 80 से 100 साल तक का होता हैं।

Read more – जानिए दालचीनी का उपयोग

धार्मिक कारण और महत्व

हिंदू धर्म में शमी के पेड़ की पूजा की जाती है यह बहुत ही पूजनीय और शुभ माना जाता है इसकी पूजा करने से बहुत से लाभ होते हैं आइए जानते हैं।

  • शमी के वृक्ष की पूजा विजयदशमी के दिन की जाती है इसमें भगवान शनिदेव का वास माना जाता हैं।
  • शमी के पेड़ की पूजा शनिवार के दिन की जाती हैं।
  • shami ka ped पूर्व दिशा में लगाना लाभकारी माना जाता हैं।
  • ऐसा माना जाता है कि इसमें अग्नि तत्व प्राकृतिक तौर पर मौजूद होता हैं।
  • भारतीय संस्कृति में जब पूजा अर्चना की जाती है तो विधि विधान से किए जाने वाले हवन में शमी की लकड़ीयों का उपयोग किया जाता हैं।
  • shami ka ped ग्रह नक्षत्रों के साथ-साथ शनि देव की बुरे प्रभाव अर्थात शनि की साढ़ेसाती से भी बचाता हैं।
  • शनि की साढ़ेसाती ढैया से बचने के लिए नित्य प्रतिदिन शमी के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए यह बहुत ही लाभकारी होता हैं।
  • भगवान शंकर को shami ka ped बहुत ही प्रिय होता हैं।

औषधीय गुण

शमी के पेड़ में काफी औषधीय गुण पाए जाते हैं अतः इसके पत्तों छाल और फूल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता हैं।

  • एनीमिया रोग – एनीमिया रोग से बचाव के लिए तरीके पत्तों का उपयोग किस प्रकार करें कि इस के कोमल पत्तों का पेस्ट बना लें लगभग 1 से 2 ग्राम और इतनी ही मात्रा में मिश्री मिला लें फिर इसका सेवन करें तो एनीमिया रोग से निजात मिलती हैं।
  • डायबिटीज अथवा मधुमेह का रोग –  मधुमेह के रोग से बचाव के लिए शमी के पत्तों पत्तों में  500 मिलीग्राम जीरा महीन पीसकर मिला लें  फिर इसमें  लगभग 200 मिलीलीटर गाय का शुद्ध दूध छानकर मिलाएं  1 ग्राम गुड़हल  की जड़ का चूर्ण  तथा लगभग 4 ग्राम मिश्री मिलाकर पिलाने से डायबिटीज में  कुछ हद तक राहत मिलती हैं।
  • गले का रोग –  shami ka ped गले के रोग में भी लाभकारी होता है  मूली बीज ,सहिजन बीज ,जौ ,सरसों एवं शमी को पीस लें और उसका एक पेस्ट बना लें इसका लेप करने से गले के रोग दूर हो जाते हैं।
  • विसर्प रोग – इसके उपयोग से विसर्प रोग से भी मुक्ति पा सकते हैं शमी के पत्तों को पीसकर उसमें दही मिलाकर लेप लगाने  से तथा इस लेप को जलन वाले विसर्प रोग से लाभ मिलता हैं।
  • बिच्छू के जहर से बचने के लिए – बच्चों के जहर से बचने के लिए शमी के तने की छाल को अच्छी तरह से पीस लें तथा बिच्छू के डंक मारने वाले स्थान पर लगाएं इससे काफी लाभ मिलता हैं।
  • सांप के जहर से बचने के लिए – इसकी छाल में नीम तथा बरगद की छाल को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें और इसका लेप सांप के काटने वाले स्थान पर लगाएं इससे सांप के काटने पर उसके जेहर से होने वाले दुष्प्रभाव से लाभ मिलता हैं।

निष्कर्ष

जैसा कि हमने बताया कि समय में बहुत ही औषधीय गुण पाए जाते हैं इसका उपयोग औषधि के रूप में भी किया जाता हैं परंतु इसका उपयोग हमें चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही करना चाहिए बिना पूरी जानकारी लिए कि हमें इसका उपयोग कितनी मात्रा में और कब करना चाहिए इसका इस्तेमाल ना करें।

आशा करते हैं आपको हमारी यह shami ka ped पोस्ट पसंद आई होगी। shami ka ped से जुड़ी कोई व जानकारी से समनबन्धित प्रश्न हो तो आप हमसे सांझा कर सकते हैं।

Leave a Comment